राजस्थान में समान पात्रता परीक्षा (CET) को लेकर स्थिति लगातार जटिल बनी हुई है। लंबे समय से इस परीक्षा को लेकर स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आने के कारण अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता दोनों बढ़ते जा रहे हैं। राज्य में विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए CET को अनिवार्य बनाए जाने के बाद से ही यह परीक्षा भर्ती प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसके आयोजन में देरी और नियमों में बदलाव की चर्चाओं ने युवाओं को अस्थिर कर दिया है। वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि जब तक CET को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पटरी पर लौटना मुश्किल है।
19 भर्तियों पर ब्रेक, प्रक्रिया ठप
राज्य में CET लागू होने के बाद कई महत्वपूर्ण भर्तियों को इसी परीक्षा के आधार पर आयोजित किया जाना है। लेकिन परीक्षा की अनिश्चितता के कारण करीब 19 भर्तियां फिलहाल अटक गई हैं। इन भर्तियों में पटवारी, एलडीसी (LDC), ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और अन्य प्रशासनिक पद शामिल हैं, जिनके लिए हर साल लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। भर्ती कैलेंडर जारी होने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे अभ्यर्थियों की तैयारी अधर में लटक गई है। कई युवा पिछले दो-तीन वर्षों से लगातार तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तारीख तय न होने से उनकी मेहनत का सही परिणाम नहीं मिल पा रहा।
20 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित
CET परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता का असर केवल कुछ भर्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करीब 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को सीधे प्रभावित कर रही है। ये वे युवा हैं जो सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटे हुए हैं और CET के माध्यम से अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। परीक्षा का आयोजन न होने से इन अभ्यर्थियों को बार-बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। कई छात्रों ने कोचिंग और तैयारी पर भारी खर्च किया है, लेकिन स्पष्ट दिशा न मिलने से उनका मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।
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निगेटिव मार्किंग और कटऑफ पर उलझा मामला
CET परीक्षा के पैटर्न को लेकर सबसे बड़ा विवाद निगेटिव मार्किंग और न्यूनतम कटऑफ को लेकर है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि परीक्षा में गलत उत्तर देने पर अंक काटे जाएंगे या नहीं। इसके अलावा, पात्रता के लिए न्यूनतम अंक सीमा कितनी होगी, इस पर भी चर्चा जारी है। सूत्रों के अनुसार, इस बार न्यूनतम 40% अंक निर्धारित किए जाने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो प्रतियोगिता और भी कठिन हो सकती है और केवल गंभीर तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को ही फायदा मिलेगा।
परीक्षा पैटर्न में संभावित बदलाव
पिछली CET परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी क्वालिफाई हो गए थे, जिसके कारण मुख्य परीक्षा आयोजित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार परीक्षा पैटर्न में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा को थोड़ा कठिन बनाया जाए और चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी किया जाए, तो भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। नए पैटर्न में प्रश्नों की गुणवत्ता, समय सीमा और मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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स्कोर की वैधता बढ़ने से राहत
CET स्कोर की वैधता को 3 वर्ष तक बढ़ाने का निर्णय अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा कदम साबित हो सकता है। पहले जहां बार-बार परीक्षा देनी पड़ती थी, अब एक बार क्वालिफाई करने के बाद अभ्यर्थी कई भर्तियों में आवेदन कर सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि तैयारी का दबाव भी कम होगा। यह निर्णय खासकर उन छात्रों के लिए फायदेमंद है जो एक साथ कई परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार और चयन बोर्ड के बीच मंथन
CET परीक्षा को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारी चयन बोर्ड के बीच लगातार चर्चा जारी है। दोनों पक्ष इस बात पर विचार कर रहे हैं कि परीक्षा को किस प्रकार आयोजित किया जाए ताकि अधिकतम पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, निर्णय में हो रही देरी से अभ्यर्थियों में असंतोष भी बढ़ रहा है।
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इसी साल परीक्षा होने की उम्मीद
कई रिपोर्ट्स में यह संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2026 में ही CET परीक्षा आयोजित की जा सकती है। यदि सरकार जल्द ही अंतिम निर्णय लेती है, तो परीक्षा की तारीख घोषित की जा सकती है और भर्ती प्रक्रिया को गति मिल सकती है। इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं को राहत मिलेगी और उनकी तैयारी को एक दिशा मिलेगी।
युवाओं की बढ़ती चिंता
CET परीक्षा को लेकर अनिश्चितता ने युवाओं के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। कई अभ्यर्थी उम्र सीमा को लेकर भी परेशान हैं, क्योंकि भर्ती में देरी होने से उनके अवसर सीमित हो सकते हैं। इसके अलावा, लगातार बदलते नियमों के कारण तैयारी करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे ताकि वे अपनी तैयारी को सही ढंग से आगे बढ़ा सकें।
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शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CET जैसी परीक्षा को सफल बनाने के लिए स्पष्ट और स्थिर नीति का होना जरूरी है। बार-बार नियमों में बदलाव और परीक्षा में देरी से न केवल अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर होता है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार को एक निश्चित कैलेंडर और पारदर्शी नियमों के साथ परीक्षा आयोजित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।